* लोग क्या-क्या बेचते हैं *

लोग क्या-क्या बेचते हैं
कोई साज बेचता है
कोई समान बेचता है
कोई जमीन बेचता है
कोई जात बेचता है,

कोई रिश्ता बेचता है
कोई नाता बेचता है
कोई वफ़ा बेचता है
कोई ईमान बेचता है
यहाँ तक की लोग
अपना जमीर बेचते हैं,

मैं देह बेचती हूँ
तो, बुरा क्या है
अपना सब कुछ लुटा के
समाज को बुराई से बचा के
मैं दंश झेलती हूँ
मैं तन बेचतीं हूँ
मैं तन बेचती हूँ।

प्रस्तुतकर्ता – नरेन्द्र कुमार

4 Comments

  1. ARVIND PANDEY 14/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" 15/10/2015
  3. नरेन्द्र कुमार 15/10/2015
  4. निवातियाँ डी. के. 15/10/2015

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