मैं तुम्हारी पत्नी हूँ – शिशिर “मधुकर”

मैं तुम्हारी पत्नी हूँ और तुम्हारे साथ हूँ
तुम्हे इसका एहसास जब होता नहीं तो मैं क्या करूँ .

हाँ मैंने तुम्हे शादी के बाद सबसे प्रिय व्यक्ति नहीं समझा तो क्या
तुम्हारे कपडे तो सदा मैंने ही धोए, रोटी भी बनाई, बीमारी में अस्पताल
ले गई, दवाई दी, ब्लड प्रेशर नापा और सदा ये चाहा की तुम्हारी नौकरी
बनीं रहे.
एक पत्नी ही तो आखिर ये सब करती है
तुम्हे इसका एहसास जब होता नहीं तो मैं क्या करूँ

हाँ जब तुम कपड़े पहन कर जँचते हो
तो मुझे कुछ देर के लिए अच्छा लगता है
लेकिन तुम्हे खाने में क्या पसंद है मुझे समझ नहीं आता
तुम्हारे पास अच्छे कपड़े हैं या नहीं मुझे इसकी चिंता नहीं होती
सत्रह साल बाद भी मैं नहीं जानती कि तुम्हारे लिए क्या नाश्ता
खाना बनाऊ
एक पत्नी होने के लिए ये जानना तो कोई ज़रूरी नहीं.
तुम्हे इसका एहसास जब होता नहीं तो मैं क्या करूँ

तुम्हारी पसंद नापसंद का मैं कोई ख्याल नहीं रखती तो क्या
ये तुम्हारी जिम्मेदारी है कि ब्याहनें के कारण तुम मुझे सब सुख दो
तुम्हारी तबीयत कि मजबूरी स्रे मुझे क्या
मेरी इच्छाओं को पूरा ना करके तुमने मेरे अरमानों को तोड़ा है
मैं फिर भी तुम्हारे साथ रहती हूँ
एक पत्नी ही तो आखिर ये सब करती है
तुम्हे इसका एहसास जब होता नहीं तो मैं क्या करूँ

तुम्हारे सब सम्बन्धियों का मैं पूरा लाभ उठाऊ ये तो मेरा अधिकार है
लेकिन तुम अपने दम पर वो ना पा पाए जो मेरे और सम्बन्धिओं ने पा लिया
तुम्हारी इस कमी के बाद भी मैं तुम्हारे साथ हूँ
एक पत्नी ही तो आखिर ये सब करती है
तुम्हे इसका एहसास जब होता नहीं तो मैं क्या करूँ

शिशिर “मधुकर”

5 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 09/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" 09/10/2015
  3. Yudhi 19/02/2016
  4. Shishir "Madhukar" 19/02/2016

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