स्त्री – शिशिर “मधुकर”

ओ ईश्वर की देन सकल मानव जीवन को
जीवन में तेरे बिन केवल है अँधियारा
फूल खिलें जो प्यार के तेरे इस उपवन में
महक जाएगा दूर दूर तक चमन हमारा .

जीवन के हर क्षण में हमको चाह है तेरी
दुःखी हुए हम जब जब तूने आँखे फेरी
सारा बचपन बना खिलौना गोद में बीता
देकर हमनें कष्ट तेरी ममता को जीता
छोड़ के पीछे बचपन जब आई तरुणाई
तूने अपने खून से फिर नई जोत जलाई
नई जोत से जीवन में फिर हुआ उजाला
बना के ज्योति तुझे आँख की सबने पाला.

ओ ईश्वर की देन सकल मानव जीवन को
जीवन में तेरे बिन केवल है अँधियारा
फूल खिलें जो प्यार के तेरे इस उपवन में
महक जाएगा दूर दूर तक चमन हमारा .

इस जीवन को जीने का कारण भी तू है
बन गंगा शिव मस्तक पर धारण भी तू है
सीता बन जो तू साथ राम के वन ना जाती
असुरों के अत्याचारों से फिर मुक्ति ना आती
सावित्री बन तूने दुनिया को दिखलाया
मौत भी हारी जब स्त्री ने साथ निभाया
जहाँ नहीं है इज़्ज़त तेरी कष्ट हैं भारी
वहाँ दुष्टों की करतूतों से मानवता हारी.

ओ ईश्वर की देन सकल मानव जीवन को
जीवन में तेरे बिन केवल है अँधियारा
फूल खिलें जो प्यार के तेरे इस उपवन में
महक जाएगा दूर दूर तक चमन हमारा .

शिशिर “मधुकर”

9 Comments

  1. आमिताभ 'आलेख' 11/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" 11/10/2015
  3. निवातियाँ डी. के. 12/10/2015
  4. Shishir "Madhukar" 12/10/2015
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/06/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/06/2016
  6. babucm 10/06/2016
  7. Shishir "Madhukar" 10/06/2016
  8. kiran kapur gulati 14/09/2016

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