रैन बसेरा -गीत -शकुंतला तरार

रैन बसेरा
ना तेरा है ना मेरा है
ना इसका है ना उसका है
ये दुनिया रैन बसेरा है

धन दौलत कितने दिन के
रूप मान कितने दिन के
क्यूँ अहंकार में डूबा है
यह जीवन एक अजूबा है
इक दिन सबको तो जाना है
क्यूँ मन में भ्रम का डेरा है
ये दुनिया रैन बसेरा है

आँखों का पानी सूखे ना
संगी साथी छूटें ना
जो आज मिले कल बिछुड़ेंगे
जो बिछुड़े शायद मिल जायें
जो छूट गया वो निराशा है
आशा जीवन की भाषा है
ये दुनिया रैन बसेरा है
शकुंतला तरार-07-10-2015

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 07/10/2015
  2. shakuntala tarar 07/10/2015
  3. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 07/10/2015
  4. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 07/10/2015
  5. राकेश जयहिन्द 07/10/2015
  6. निवातियाँ डी. के. 07/10/2015
  7. shakuntala tarar 12/10/2015

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