जुल्मी तेरी निगाहें [गजल]

महफिल की भीड मे मेरा शिकार करती !
जुल्मी तेरी निगाहें खंजर सी वार करती !!

कह दो उन्हे जरा सी नजरें झुका लें अपनी !
सातिर बडी निगाहें चुन-चुन प्रहार करती !!

छुप जाऊं गर कहीं भी थोडी सी आड लेकर !
आतुर तेरी निगाहें पल-पल गुहार करती !!

आखों मे सजाये अपने काजल की धार पैनी !
कातिल तेरी निगाहें दिल को हलाल करती !!

रखली उतार के पलकों पे ख्वाब सारे !
शायद तेरी निगाहें चाहत बेसुमार करती !!

अनुज तिवारी

9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 06/10/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 06/10/2015
    • Er. Anuj Tiwari"Indwar" 07/10/2015
  3. राकेश जयहिन्द 07/10/2015
    • Er. Anuj Tiwari"Indwar" 07/10/2015
  4. निवातियाँ डी. के. 07/10/2015
    • Er. Anuj Tiwari"Indwar" 07/10/2015
  5. अतुल तिवारी 'वशिष्ठ' 18/11/2019

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