तेरी मर्जी – शिशिर “मधुकर”

तेरी दुनियाँ में आज हो गए अकेले हम
अब ये मर्जी है तेरी दे मुझे ख़ुशी या ग़म
अब ना रोऊँगा, ना हसुँगा, ना जलूँगा कभी
जिसमे मर्जी हो तेरी काम वो करूँगा सभी
ख़ुशी गर काम से मेरे कभी मिल जाए तुझे
करके एहसान अपने पास बुला लेना मुझे.

शिशिर “मधुकर”

3 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 14/10/2015
  2. आमिताभ 'आलेख' 14/10/2015
  3. Shishir "Madhukar" 14/10/2015

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