ख्वाब

बुन रही है
कोई ख्वाब जिंदगी
जिनमे खामोशियों के
पड़े हैं कुछ बूटे
और सुख दुःख के
फंदे दो रगें हैं
यादों के सुनहरे
सपनो के धागे
जिसको आधा-आधा
आपस में बांटे हैं
कुछ बुन लिया है
कुछ बुनने को बाकी हैं
सपनो के धागों के सिरे लम्बे है
गांठें पड़ी हैं छुपा लिए तुमने
तेरे बुनने की तरकीब निराली है

shweta misra

8 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 05/10/2015
    • Shweta 10/07/2019
  2. Shishir "Madhukar" 05/10/2015
    • Shweta 10/07/2018
    • Shweta 10/07/2019
  3. निवातियाँ डी. के. 05/10/2015
    • Shweta 10/07/2018
  4. Shweta 10/07/2018

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