“प्रकृति २”

मेघों से ढकी वादियाँ
हवाओं में गुनगुनाहट।
भंवरों का गुंजन
फूलों की मुस्कुराहट।
खगों का कलरव
वृक्षों के पत्तों की मरमराहट।
खामोश फिज़ाओं में
जीवन की सुगबुगाहट।
चहुँ ओर फैली है
रोशनी की जगमगाहट।
कहो प्रकृति देवी!
आपके आंगन में आज
किसके आने की है आहट।

“मीना भारद्वाज”

6 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 30/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" 30/09/2015
  3. Meena bhardwaj 30/09/2015
  4. Meena bhardwaj 30/09/2015
  5. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 01/10/2015
  6. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 01/10/2015

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