यादें – शिशिर “मधुकर”

मैं तो नहीं चाहता बात करूँ लेकिन कोई बात चला देता है
मैं तो नहीं चाहता याद करूँ लेकिन कोई याद दिला देता है
एक टीस सी अंदर है छुपी हुई जो बाहर निकल फिर आती है
याद कराकर उसको फिर जो मुझको खूब रुलाती है
कोई पल ऐसा नहीं होता है जो मैं उसको याद नहीं करता
इतना सहने के बावजूद मेरे दिल का प्यार नहीं मरता
जो बात थी उसमें वो मैंने किसी और में कभी ना पाई है
कोई ले ना सकेगा उस जगह को जो उसने मेरे दिल में बनाई है
उसकी साँसों में थी बसी हुई खुशबू गुलाब और चन्दन की
उसकी आँखों में थी सजी हुई सुंदरता एक उपवन की
मैंने पाया इन दोनों को यह मेरी अच्छी किस्मत थी
पर पाऊँ मैं हरदम पास उसे ऐसी ना उसकी रहमत थी
अब उसने जो भी कर डाला मैंने सब है मान लिया
आशाए क्या होती है ये भी मैंने जान लिया
अब इच्छा है मैं करूँ वही जो उसने मुझसे चाहा था
और ख़त्म करूँ वो सब कारण जिस पर उसने ठुकराया था

शिशिर “मधुकर”

2 Comments

  1. पवन 01/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" 01/10/2015

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