आईने के पीछे रहकर…

आईने के पीछे रहकर हासिल न कुछ तुम्हे होगा,
सामने आओ आईने के हकीक़त से सामना होगा।

मौत से जितना डरोगे उतना ही डराएगी,
गले लगा लो मौत को तो ज़िन्दगी से सामना होगा।

क्यों लड़ रहे हैं मज़हब आखिर ख़ुदा को पाने के लिए,
इंसान को अपना के देखो ख़ुदा से सामना होगा।

ऐ काश ! के पूछे कोई मेरी खुशी का राज़,
मैं बताऊँ फिर ये के आज उनसे सामना होगा।

— अमिताभ ‘आलेख’

6 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 29/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' 29/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" 29/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' 29/09/2015
  3. Bimla Dhillon 29/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' 30/09/2015

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