इंतज़ार – शिशिर “मधुकर”

कितना करूँ इंतज़ार तुम्हारा ओ कल्पना मेरी अब तो आओ
जीवन के इस अंधे पथ पर बन के रोशनी रह दिखाओ.
कब तक चलता रहूँ अकेला इन पथरीली राहों में
अब तो आकर डालो अपनी बाहें मेरी बाँहों में
अपनी शक्ति से तुम मेरी शक्ति का विस्तार करो
जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा का संचार करो
तुम पास नहीं हो तुम्ही बताओ कैसे इतना प्यार मैं बाटूँ
साथ से जो उत्पन्नं हुआ कैसे तन्हा वो जीवन कांटू
आओ अब तुम आकर अपना आँचल मेरी सर पर डालो
डूब रहा हूँ जिस सागर में मुझको उससे बाहर निकालो.

शिशिर “मधुकर”

2 Comments

  1. pankaj charpe 26/10/2015
    • Shishir "Madhukar" 01/12/2015

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