मेरी कल्पना-शिशिर “मधुकर”

मैं जानता हूँ मेरी कल्पना
तुम मुझसे कितना प्यार करती हो
तभी तो मैं इस कदर तड़पता हूँ.
हालांकि तुम मेरे पास नहीं हो
और ना ही मुझे तुम्हारी कोई पहचान है
लेकिन तुम्हे ही तो बनाया है
उस परमपिता ने मेरे लिए.
तुम्हे अभी और इंतजार करना होगा
और मुझे अभी और तड़पना होगा
क्योंकि अभी तो हम अपने उद्गम से निकलकर
संगम तक अपने मार्ग से पहुँच रहें हैं
संगम पर मैं और तुम हम होंगे
और हम चलेंगे गहरे सागर की बाहों में
सदा के लिए एक होने, सदा के लिए एक होने.

शिशिर “मधुकर”

2 Comments

  1. pankaj charpe 26/10/2015
    • Shishir "Madhukar" 01/12/2015

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