दर्द का रिश्ता -शिशिर “मधुकर”

दर्द के रिश्ते को तुमने भी सदा दिल में छुपाया
गुजरे जमानें बाद फिर लम्हा तुम्हे वो याद आया
छोड़ के जब तुम मुझे एक और जन्नत में गए थे
देख महलों की चमक जब तोड़ कर दिल को गए थे
तुम क्या जानो किस कदर दिल था मेरा तुमने दुखाया
खुद भी रोए और मुझको भी था यूँ बरसों रुलाया
छोड़ कर जब तुम गए थें बाँहों से अपनी मेरी बाहें
यूँ लगा जैसे बिछड़ गई साथ में चलती दो रहें
राह में चलते अकेले ख्याल जब तुम्हे मेरा आया
जीवन में मेरे आ चूका था प्यार का वो दूजा साया.

शिशिर “मधुकर”

7 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 11/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" 11/10/2015
  3. आमिताभ 'आलेख' 12/10/2015
  4. Uttam 12/10/2015
  5. निवातियाँ डी. के. 12/10/2015
  6. Shishir "Madhukar" 12/10/2015
    • आमिताभ 'आलेख' 12/10/2015

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