तुम परेशान थी

तुम परेशान थी और एक साथ की जरूरत थी
गिरने ना दे जो थाम ले उस हाथ की जरूरत थी
मैं तो कब से बाँह बढ़ाए राह में खड़ा था मगर
तुमने देर से देखा तेरी नज़र न सहमत थी
भंवर में फँस जाए तो मांझी भी डूब जाते हैं
जान बचाने में तो तिनकों की भी मेहनत थी
न दे कुछ और उसने तुम्हे दे दिए ये चाहने वाले
लोग कहते हैं कि तुम पर तो उसकी रहमत थी
चाहने वालों से इतना दूर इसलिए मत भागो
बुलाने पर कहीं वो पूछ न लें क्यों ये जहमत की.

शिशिर “मधुकर”

8 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 22/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" 22/09/2015
  3. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 22/09/2015
  4. Shishir "Madhukar" 22/09/2015
  5. omendra.shukla 23/09/2015
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2015
  6. sukhmangal singh 24/09/2015
  7. Shishir 24/09/2015

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