नीला अम्बर

कहाँ नहीं है श्याम बता
नीला जल है नीला अम्बर
जित देखूँ तित श्याम खड़ा
श्याम धुन बड़ी प्यारी लागे
मंद मंद जो बंसी बाजे
उस पर वारी बलिहारी जाऊं
बंद पलकों में दर्शन पाऊँ
जल में थल में हो या नभ में
बसा है तू हर कण कण में
जैसे बसि कला हर जीवन में
कितने अद्भुत आकर बनाये
कैसे कैसे रंग सजाये
देखें तो हम दंग रह जाएँ
तेरी तो हर बात निराली
सबके मन को मोहने वाली
देखूं जिधर बस तू ही तू
हर पल में तू हर क्षण में तू
पवन बन रहता आकाश में
प्राण बन रहता हर साँस में
नीला जल है नीला एम्बर
जित देखूं तित श्याम खड़ा
कहाँ नहीं है तू यह तो बता

6 Comments

  1. Hitesh Kumar Sharma 14/09/2015
    • kiran kapur gulati 14/09/2015
      • kiran kapur gulati 14/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" 14/09/2015
    • kiran kapur gulati 14/09/2015
  3. D K Nivatiyan 15/09/2015

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