गुरु वंदना ।

जब राह भटके तो रह दिखते,
सब के किए नई दीप जलते,
करे प्यार पर डांट लगते,
जीवन को हमारे साकार बनाते।

नई किरण यह लेकर आते,
मन का अंधेरा दूर भागते,
करे उजियाला नई राह बताते,
हमे उसपर चलना सिखलाते।

धर्म अपना ये निभाते,
हमे सत्य का पाठ पढ़ाते,
जीवन का संग्राम दिखते,
हमे उससे लड़ना सिखलाते।

करू मै श्रद्धा यही आस लगाऐ,
आशीर्वाद हमेशा आप का पाऐ
गुरु हो आप हम शिश झुकाऐ
धर्म अपना करे खुदाऐ।

——संदीप कुमार सिंह ।

4 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 13/09/2015
  2. संदीप कुमार सिंह 13/09/2015
  3. kiran kapur gulati 14/09/2015
    • sandeep 19/09/2015

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