जिन्दगी के दौर

सब दौर हैं जिन्दगी के गुजर जाएंगे
खिले हैं जो फूल सब बिखर जाएंगे।

होता है कोई खुश यदि अपनें शबाब पर
जान ले कि जिन्दगी है सिर्फ ख्वाब भर
टूटेगा जब ये ख्वाब सच से सामना होगा
सच की हर कड़वाहट को मानना होगा
रिश्तों के सारे बर्फ ये पिघल जाएंगे
बन के आंसू आँख से निकल जाएंगे।

सब दौर हैं जिन्दगी के गुजर जाएंगे
खिले हैं जो फूल सब बिखर जाएंगे।

कितना भी कोई चाहे साथ जाएगा नहीं
जाने वाला लौट कर फिर आएगा नहीं
जाएंगी सिर्फ साथ भलाई बुराईयाँ
समय के साथ धुधंली होंगी परछाईयाँ
जो जिए अपनें लिए वो भुला जाएंगे
दूसरों को चाहने वाले याद आएगे।

सब दौर हैं जिन्दगी के गुजर जाएंगे
खिले हैं जो फूल सब बिखर जाएंगे।

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. omendra.shukla 12/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" 12/09/2015
  3. चन्द्रप्रकाश 21/10/2015
  4. Ashita Parida 25/10/2015
    • Shishir "Madhukar" 25/10/2015

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