माँ

जो माँ न होती तो क्या होता

सबसे पहले संसार न होता

ममता की बरसात न होती

प्यार की कोई बात न होती

माँ से बढ़ कर धीरज किसका

न सारे जग में सानी उसका

उसके तन से काया ढलती है

ममता की छाया में पलती है

माँ की छवि कैसी न्यारी

हर बात है उसकी प्यारी प्यारी

दर्द सभी वह सह लेती है

दान जीवन का वोः देती है

वोः जननी है दुःख हरणी है

आँख में आंसू जब आते हैं

हाथ माँ के सहलाते हैं

भगवन का इक वरदान है माँ

हमारी ही पहचान है माँ

कभी दिल उसका जो रो उठता है

धीरज भी जब खो उठता है

मन को वोःसमझा लेती है

ममता की चादर में

सारे आंसू छुपा लेती है

आज ज़माना बदल गया है

चमक दमक में मचल गया है

कभी बचपन खुद का याद करो

कुछ बीती बातें याद करो

माँ की खुशबू आएगी

बहा हमें ले जायेगी

होती है क्या प्यार की बारिश

सब कुछ हमें बताएगी

होता अतुल्य माँ का प्यार

कर देती अपना जीवन वार

न दुखे कभी किसी माँ का दिल

यह वादा ही तो करना है

अपनी माँ के चरणो में

सर को ही तो धरना है

ममता का कोई मोल नहीं

बिन मांगे मिल जाती है

माँ का भी कोई तोल नहीं

पीछे दुनिआ रह जाती है

Mumta ki

2 Comments

  1. Anuj Tiwari"Indwar" 18/08/2015
  2. Kiran Kapur Gulati 18/08/2015

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