महालक्ष्मी हमारी माँ तुम्हें हम याद करते हैं

महालक्ष्मी हमारी माँ, तुम्हें हम याद करते हैं |
कृपा हम पर करो माता, कि हम फ़रियाद करते हैं ||

बिना धन के धरा पर माँ, न कोई मान देता है |
समझते मूर्ख सब उसको, जो’ हर बलिदान देता है ||
हँसी कोई उड़ाता है, को’ई अपमान कर देता |
अकिंचन को न किंचित माँ, को’ई सम्मान देता है ||
मेरी तुमसे शिकायत है, कि सज्जन क्यों यहाँ निर्धन ?
बिदूषक क्यों धनीं होकर, धरम बर्बाद करते हैं ||

विवादों में फसीं विद्या, धरम तो बिक गए जैसे |
निगमधारी हैं द्विज निर्धन, न उनके पास हैं पैसे ||
निराले खेल तेरे हैं, न मैं माता समझ सकता |
बनाया क्यों मुझे भोला, भला समझूंगा’ मैं कैसे ?
खिलाड़ी अब बना दो माँ, ये’ दुनिया सात रंगी है |
अनाडी से यहाँ पर तो, सभी प्रतिवाद करते हैं ||

हुआ हूँ आर्त माता मैं, दया की दृष्टि अब कर दो |
मे’री झोली भरो माता, कि धन की वृष्टि अब कर दो ||
हमारे छंद बनकर मंत्र, तेरी कीर्ति को गायें |
जगत जननी महालक्ष्मी, नियति नव सृष्टि अब कर दो ||
न तिनके का मान कोई, बिना धन के मैं तिनका हूँ |
करो परिपूर्ण अब धन से, तेरा जयनाद करते हैं ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9582510029

Leave a Reply