जिद्द

एक बार आसमान
हांं वो आसमान
ठहाके लगाते हुए
मेरा उपहास कर रहा था
अपने अभिमान का पहाड
मेरे सर पर फैलाए
मेरे हौसलोंं को पश्त कर रहा था
वो उपहास मुझसे सहा न गया
मैंंने कहा
तू ठहर
मेैंं दिखाता हूँ
तूंं कौन है
और मैंं कौन हूंं
बस उस दिन से
स्वयंं को साबित करने मेंं लगा हूंं……………

2 Comments

  1. sukhmangal 22/05/2015
    • sanjay kumar maurya 21/06/2015

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