किस बात का पश्चाताप

किस बात का पश्चाताप है
ईश्वर का शाप है
कल वह था
आज आप हैं
परसों किसी और का अलाप है
कहीं विच्छेद है
तो कहीं मिलाप है
कहीं पाप है
तो कहीं राम नाम का जाप है
यही तो समस्त संसार का कार्यकलाप है
सुख के पश्चात दुख
दुख के पश्चात सुख
अटल है जब यह निरंतरता
तब किस बात का करना है हुक
निसंकोच तू चलता रहा है जीवन पथ पर
लेकिन देखो सम्मुख खड़ी है मृत्यु
क्रियांवित होता रहेगा सृष्टि नियम ।
कभी उमस है तो कभी ठण्ड है
कभी ठण्ड है तो कभी ताप है
फिर नाहक सोचकर उबने की क्या बात है
तुम जानते हो भांप बूंद बनकर
बारिश में पानी का रूप लेता है
और पानी से बनता भांप है
मानव से मिट्टी का अस्तित्व
मिट्टी से मानव है
ये जग
निर्मित से नाश होने का संगम है
इसकी कार्यगति पर
न किसी का जोर चलता है न चलेगा
हमारा बस एक ही ध्येय होना चाहिए
कि भगवान के चरणों में समर्पित कर
प्रत्येक कार्य करें
चिंता न करें
क्योंकि यह व्यर्थ है
और इसका परिणाम सुखद भी न आने वाला है
इसलिए यही सोचें
जो भी मिला ईश्वर का प्रसाद है
भगवान सबका ही रखवार है
और सबकुछ उसी के हाथ है
फिर किस बात का पश्चाताप है ।

2 Comments

  1. Mohit Dwivedi 11/05/2015
  2. sanjay kumar maurya 11/05/2015

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