हाल-ए-दिल

जैसा तूने कहा वैसा हर बार कर दिया
तेरे इश्क़ ने मुझको बीमार कर दिया

छीन लिया है मेरा चैन-ओ-करार
और जीना मेरा दुश्वार कर दिया

ना जाने कितनी कश्तियों की बाट जोहि मैंने
तूने हाथ पकड़कर मुझे उस पार कर दिया

कभी किसी ने पूछा नहीं हाल मेरा मुझसे
तूने हाल पूछकर मुझे बेहाल कर दिया

“नितिन” न जाने कब से भटक रहा था ज़िन्दगी के अंधेरो में
तेरे तस्सवुर के चरागों ने सफर आसान कर दिया

4 Comments

  1. आमिताभ 01/05/2015
    • nitin 02/05/2015
  2. नन्द्किशोर 09/05/2015
    • nitin 02/08/2015

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