तोडके दिल पछताना कैसा

”तोडके दिल पछताना कैसा
अब हमसे कतरना कैसा ,
आँहे भरकर रोते क्यों हो
अब शर्मिंदा होते क्यों हो
छम-छम नीर बहाना कैसा
तोडके दिल ….
वक़्त गए फिर मुड़ते कब है
दिल टूटे तो जुड़ते कब है
टुकड़े चुन-चुन लाना कैसा
तोडके दिल ….
आस का दामन छूट चूका है
साज वफ़ा का टूट चूका है
टुटा साज बजाना कैसा
तोडके दिल ….
फीकी रंगत बिखरे गेंसु
लव पर आँहे आँख में आंसू
अब ये ढोंग रचाना कैसा
तोडके दिल ….
आज ना अब तुम नीर बहाओ
गुजरी बाते भूल भी जाओ
सर में अब टकराना कैसा
तोडके दिल ….”

2 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 28/04/2015
    • omendra.shukla 29/04/2015

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