यादें

बीते लम्हों के झुरमुट से
झांकती यादें
मासूम निगाहों से
तकती हैं
आज को
मगर आज
अपनी रफ़्तार से
बढ़ जाता है
आगे …
छोड़ जाता है
फिर से
कुछ यादें
जो बन जाती हैं
हिस्सा
बीते लम्हों के
झुरमुट में
ठहरी हुई यादों का

rachana sharma

11 Comments

  1. राम केश मिश्र 10/04/2015
    • rachana 13/04/2015
  2. sandeep 10/04/2015
    • rachana 13/04/2015
  3. Anupam S Shlok 10/04/2015
    • rachana 13/04/2015
  4. Sharad Bhardwaj 14/04/2015
  5. आमिताभ 24/04/2015
  6. DR. GANGADHAR DHOKE 02/05/2015
  7. Gurpreet Singh 19/12/2015
  8. babucm 26/04/2016

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