दुनियादारी

कुछ लिखूँ तो
उसे सुना देना
किसी बच्चे
को बुला लेना

कहना की
दिल के अरमान है
बस सिर्फ बचपन मे
ही आराम है

तुम समेट कर
सो जाओ दिल अपना
इन अंधेरों मे देखो
नव जीवन का सपना

कोमलता दिल से
निकलने मत देना
दिल के तारों को
बिखरने मत देना

रखना प्यार पूरा जो
उपरवाले ने दिया
रहमतों का जखीरा
विरासत में जो मिला

सजाना अपनी दुनियाँ
मन के उजाले से
मधु रंगीनियाँ
आँखों के उजाले से

भोलापन तेरा खुदा करे
की रहमत बने
सब सासें ,दुआ करे
ऐसी तेरी किस्मत बने

रूह से तेरी कभी
सादगी जाये नहीं
गन्दगी दुनियादारी की
तुझे रास आये नहीं

One Response

  1. वैभव दुबे 09/04/2015

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