Jazbaat

मेरी आवाज़ सुनकर के तुम्हारा जी बहलता है
तुम्हारी इन अदाओं पर हमारा दम निकलता है

मेरी खामोशियों को जब से तेरा दिल समझता है
तुझे पाने को तब से सर मेरा सजदे में झुकता है

हमारी हर परेशानी का तुझको इल्म होता है
तेरी बेचैनियों के साथ मेरा दिल भी रोता है

अभी से दिल मेरा तुझको मेरा हमदम समझता है
तेरे दिल से ज़रा सा पूछ मुझको क्या समझता है

मेरी दुल्हन तू है दिल को गुमान ये रोज़ होता है
मेरे ख्वाबों में तेरी मांग में सिन्दूर होता है

3 Comments

  1. Dr. Nitin Kumar pandey 27/07/2017
  2. babucm 27/07/2017
    • Dr. Nitin Kumar pandey 28/07/2017

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