।।गजल।।मौत का मार निकला।।

।।गजल।।मौत का मारा।।

हर वह शक्श जो भी बेशहारा निकला ।। ।।
कोई गम में डूबा कोई वक्त का मारा निकला ।। 1।।

वजह कुछ भी रही हो पर वफ़ा का नाम जब पूंछा ।।
कोई दर्द से बोझिल कोई वक्त का मारा निकला ।। 2।।

बात जब होने लगी प्यार की गहराइयो की ।।
याद में तन्हाइयो में हर कोई बेचारा निकला।। 3।।

अब करकने है लगा पलको पर बन एक कांटा ।।
जो दूरियों में रह कभी आँख का तारा निकला ।। 4।।

क्या करोगे तुम समझकर चाहतो की बेबसी ।।
इश्क में जो मिला मौत का मारा निकला ।।5।।

&&&&&

One Response

  1. Roshani mehar 28/03/2019

Leave a Reply to Roshani mehar Cancel reply