इस बार नही

हर बार तो वर्षा आने पर
खुश होते थे सारे किसान
हर बार तो बादल छाने पर
मोर ये नाचा करते थे
हर बार पानी की बूंदो में
मेंढक टर्राया करते थे

ना जाने क्यों इस बार नही

हर बार ठण्ड के मौसम में
ये धुप सुहानी लगती थी
हर बार सर्द की रातो में
ये चाँद सलोना लगता था
हर साल तो ठंडी हवा का झोका
चेहरे पे मुस्कान ले आता था

ना जाने क्यों इस बार नही

हर बार तो गर्मी पड़ने पर
गेहूं के खेत लहलहाते थे
चैत्र बैसाख के महीनो में
आमो के बागान भर जाते थे
हर बार ग्रीष्म के मौसम में
पीपल की छांव सुहानी लगती थी

ना जाने क्यों इस बार नही

इस क्यों का कारण केवल हम है
प्रकृति पर ढाया गया हमारा सितम है
आओ मिलकर इस्सकी रखा करे
हम अपनी ही सुरक्षा करे

ताकि फिर ना दोहराना पड़े
ना जाने क्यों इस बार नही

ना जाने क्यों इस बार नही I

12 Comments

  1. vandana 22/02/2015
    • Archana 22/02/2015
  2. राम केश मिश्र 22/02/2015
  3. राम केश मिश्र 22/02/2015
    • Archana 22/02/2015
  4. VIRENDRA PANDEY 23/02/2015
    • Archana 23/02/2015
  5. vaibhav.negi 25/02/2015
    • Archana 25/02/2015
  6. Amod Ojha 27/02/2015
  7. Amod Ojha 28/02/2015
    • Archana 28/02/2015

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