मत पियो कोई शराब मेरे यार

मत पियो कोई शराब मेरे यार, ये आदत खराब है!
कोई गर लाती है तबाही तो ये ही शराब है!
कभी हुआ करता था मैं भी, आशिक शराब का
थी वो बदसूरत शक्ल से,और बदबू खराब सा
फिर भी ना जाने क्यूँ था मैं, आशिक शराब का
मैने प्यार किया इसे दिल से पर इसने हर कदम पे दगा दिया
जिसकी खातिर सालों की शाम तावाह की ,उसने ऐसा सिला दिया!
सब कहते थे कि,ये बुरी है,मैं मानता ही नही था
अपनी मादक अदा से ये डॅन्सती है,मैं जनता ही नही था
अब समझ मे आई खा के ठोकरें हसरत शराब का
मत करो यार कोई प्यार इस बेवफा से, बुरी आदत शराब का !

शराब शराब है, ये बेहद ही खराब है
गर खराब है तो खराब है,इसमे कौन सी दो राय है
ये बर्बादी की जड़ है,इसके उगे पेड़ का फल बेहद ही खराब है
मुस्कुराते घर आँगन मे कलह की सौगात जो लाए उसका नाम शराब है!

अभय कुमार आनंद
बिश्णुपूर, शंभूगंज, बाँका
बिहार

2 Comments

  1. rakesh kumar 19/12/2014
    • abhaykumaranand 20/12/2014

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