गीत -न इतरा कृष्ण पर गोपी किशन बलहीन हो जाते |

न इतरा कृष्ण पर गोपी, किशन बलहीन हो जाते  |
समय बलवान होता है, मुरारी दीन हो जाते ||

यवन से हार कर रण में, किशन रण छोड़ कहलाये |
धनन्जय गोपियाँ लेकर, चले थे कृष्ण बिलखाये ||
लुटेरे कोल भीलों ने, वो’सुमुखी गोपियाँ लूटीं |
हुआ गांडीव बुजदिल था, परंतप क्षीन हो जाते  ||

समय जब साथ देता है, सियासुत जीतते रण में |
पराजित वंश हो जाता, उलझते रामजी प्रण में ||
समय सिद्धान्त पक्का है ,वृथा तप हो नही सकता |
वही लवकुश अवध के तख़्त पर आसीन हो जाते ||

को’ई अभिशाप बन छाया, कभी जब साथ में हो ले  |
सितमगर का सितम मगरूर , हो सर चढ़ के’ जब बोले ||
समय करवट बदलता है ,तो’कट अभिशाप जाता है |
मुकद्दर के सभी पन्ने ,बहुत रंगीन हो जाते ||

समय का है कहर ऐसा, जो’ सब पर ही गरजता है |
समा कर आँख में जैसे, कि बादल बन बरसता है ||
समय को दोष कैसे दें, समय समभावकारी है |
समय की मार से राघव, किशन ग़मगीन हो जाते ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9582510029

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  1. Rajeev Gupta 24/11/2014

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