ग़ज़ल

मेरे दिल ने भी
दुआ की थी उसके लिए।
जिसने छोड़ दिया मुझे
जमाने के लिए।।
नशा अभी उतरा भी नहीं
उसके प्यार का
कि पीना पड़ा जाम
उसे भूलाने के लिए।।
शाम पड़े याद आ जाती हैं
वो हँसी उसकी।
मचलने लग जाता है दिल
तभी उसे पाने के लिए।
तभी याद करता हूँ
उसका वो जालिम चेहरा
जिसने बर्बाद किया था मुझे
किसी ओर को पाने के लिए।।

4 Comments

  1. Anmol tiwari 11/11/2014
  2. अनमोल तिवारी 14/11/2014

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