सबसे पहले भारत

“सर कटता है सैनिक का तो किसी का क्या जाता है।
बैठ नेता दिल्ली में मुर्ग मुसल्लम खाता है।
गिराकर लाशें अक्सर हमारे सैनिको की,
वो पिद्दी भर का देश हमें चिढाता है।
बहुत हुये पोखरण परीक्षण,
अब असल परीक्षण की बारी है।
अब साबित करना है हमको,
कि अभी बची हममे खुद्दारी है।
कभी पंजे नापाक चुभोता,
हमारी सशक्त भुजाओं में।
कभी चीन घुसता आता है,
हमारी चाक चौबन्द सीमाओं में।
क्यूं बांग्लादेश पर भॄकुटी ताने रह जाते है,
ऐसा क्या है जो हम सब कुछ यूंही सह जाते है।
ना होता 65 और 71 ना तो करगिल होता,
गर नेताओ मे भी सैनिक सा दिल होता।
ना जलता तिरंगा कश्मीर में,
वन्देमातरम हर जुबां में शामिल होता।
गर नेताओ मे भी सैनिक सा दिल होता।
अहिंसक है हम नपुंसक नही,
ये सिद्ध हो जाने दो।
खोये है जिन मांओ ने लाल,
उनकी आंखों में चमक आ जाने दो।
जब तक वो कश्मीर छोड लाहौर लाहौर न चिल्लायेंगें,
तब तक वो शैतान मानवता की भाषा सीख न पायेंगें।”

जय हिन्द, जय हिन्द की सेना – डॉ रविन्द्र कुमार

9 Comments

  1. Kumar Ravindra 02/11/2014
  2. D K Nivatiya 03/11/2014
    • Kumar Ravindra 05/11/2014
  3. BHASKAR ANAND 03/11/2014
    • Kumar Ravindra 05/11/2014
  4. अरुण जी अग्रवाल 04/11/2014
    • Kumar Ravindra 05/11/2014
  5. Raj kumar 21/12/2014
    • Kumar Ravindra 22/12/2014

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