और नया साथी होता

और नया साथी होता कोई
और नया मंजर होता,
आज तुम्हारे अधरों को मैं
चूम न लेता क्या होता?
देवलोक की हूर नहीं तुम
ना तुम मलिका सावन की,
माँग तेरी मैं ना भरता तो
बोल तेरा फिर क्या होता?
घास डालता कोई नहीं तू
नागिन जैसी लहराती,
दर-दर फिरती ठोकर खाती
सबके तलवे सहलाती,
मैंने तुझको जन्नत दे दी
देवलोक का राज दिया,
करता ये अहसान नहीं तो
बोल तेरा फिर क्या होता?
भइया के घर कबतक रहती
कबतक फिरती गली-गली,
छुपा-छिपी के खेल में तू
होती और जवान चली,
भरी जवानी से लद जाती
लाता अगर बारात नहीं,
पहनाता मंगलसूत्र नहीं तो
बोल तेरा फिर क्या होता?
थू-थू होती तू ना होती
होते थुक्कम थुक्का लोग,
चढ़ जाती शूली पर अबला
अनर्थ को देते धक्का लोग,
हमने तो बस अपनी खातिर
तेरे दिल को मान दिया,
माँगी होती स्वप्न सुन्दरी
बोल तेरा फिर क्या होता?

(शुरुआती दौर में धर्मपत्नी
से मटरगश्ती करते हुए)

4 Comments

  1. आनन्द कुमार दोहरे 02/11/2014
    • Mukesh Sharma 02/11/2014
  2. Rinki Raut 03/11/2014
    • Mukesh Sharma 03/11/2014

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