सशक्त होकर उभरे कुछ ऐसे अपना हिन्दुस्तान

“सशक्त होकर उभरे कुछ ऐसे,
अपना हिन्दुस्तान।
शीश झुकाये खडा हो चीन,
और हाथ जोडे पाकिस्तान।
सशक्त होकर उभरे कुछ ऐसे,
अपना हिन्दुस्तान।
फिर से बहे दूध की नदिया,
कर्ज में मरे न कोई किसान।
बंशी की धुन सुने फिर से गौशाला,
गीत फिर वही गाये खलिहान।
सशक्त होकर उभरे कुछ ऐसे,
अपना हिन्दुस्तान।
ऐसा कभी न होगा कहके जब कोई,
पागल मुझे बताता है।
मै कहता हूं तुम न भूलो,
भारत क्यूं विश्व गुरू कहलाता है।
भारत मां ने कुछ ऐसे बेटे जाये है,
वीर शिवाजी और प्रताप इसकी धरती पर आये है।
घास की रोटी खायी है पर,
पर न झुकने दिया स्वाभिमान।
जिस दिन ऐसे लाल भारत की धरती पर आयेंगें,
फिर से गगन चुमेगा अपनी आजादी का निशान।
सशक्त होकर उभरेगा फिर,
कुछ ऐसे अपना हिन्दुस्तान।”

3 Comments

  1. Kumar Ravindra 22/12/2014
    • Kumar Ravindra 30/12/2014

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