माँ की रोटी

पहली रोटी फेंक दी मैंने,बोलकर
माँ,ऊपर से जला है,
दूसरी रोटी फेंक दी मैने,बोलकर
माँ,नीचे से जला है,
फिर खाया दोनो रोटियों को,
बड़े प्रेम से जब देखा मैंने,
रोटियाँ सेकते सेकते मेरे लिए,
माँ का हाथ तो,
ऊपर से भी जला है और,
नीचे से भी जला है.

4 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 01/11/2014
  2. BHASKAR ANAND 02/11/2014
  3. Mukesh Sharma 04/11/2014
  4. Sandeep Singh "Nazar" 04/11/2014

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