एक झलक

वक़्त बेवक्त ही सही, मेरे ख्वाबों में सही,
लहराते बादल सी तुम,
आया करो, बरस जाया करो।

बहुत सूख गया है मेरा जहन,
उस बियाँबान को गुलिस्तां करने,
आया करो, बरस जाया करो|

बहुत देखे मौसम इस दिल ने,
अब हरसूं सावन तुम,
आया करो, बरस जाया करो।

नहीं मुमकिन अगर मिलना रोज़, न सही,
एक झलक तो दिखलाया करो,
बस मुस्कुराया करो।

6 Comments

  1. Sandeep Singh "Nazar" 20/10/2014
    • जितेन्द्र 24/10/2014
  2. Sandeep Jagtap 21/10/2014
    • जितेन्द्र 24/10/2014
  3. अरुण जी अग्रवाल 24/10/2014
    • जितेन्द्र 24/10/2014

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