जगत जननी माता दुर्गा के चरणों में मेरा एक गीत …

जगत जननी ओ’ जगदम्बे दया मुझ पर भी’ कर देना |
बहुत मजबूर हूँ मैया, मेरी झोली भी भर देना ||

बना माता खिलौना मै, को’ई भी खेल लेता है |
हजारों दर्द मिलते है, मगर दिल झेल लेता है ||
न माँ क्षमता रही मुझमे न अब मै झेल पाऊंगा |
दिखा दो छाँव ममता की, मेरी मैया मेहर देना ||

को’ई तो घाव देता है को’ई उनको दुखाता है |
मे’री माता तुम्ही देखो, को’ई मुझको रुलाता है ||
बिना अपराध के ही माँ, सदा दण्डित हुआ हूँ मै |
दुखों से दूर हो जाऊं, मुझे ऐसा हुनर देना ||

बहुत भटका हुआ हूँ मै, मगर माँ तेरा’ बेटा हूँ |
नहीं मै जानता पूजा, मगर चरणों में लेटा हूँ ||
अभागे  हाय  हम कितने ? कभी तेरे न गुण गाये |
दयालू मातु तुम दुर्गे सदा सदगुण लहर देना ||

सितमगर है हुई दुनिया, न दुनिया को रहम कोई |
सितम झेलें है हमने सब, बचा है ना सितम कोई ||
हजारों रक्त बीजों को, तुम्हीं ने था कभी मारा |
सितमगर रक्त सौदागर, हुए है माँ नजर देना ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9582510029

2 Comments

  1. manoj charan 29/09/2014

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