दोस्ती का गुलशन

1-
दोस्ती का गुलशन
महकता है कैसे,
ये देखने दिखाने आ गए,
दुश्मनों की गंध पाकर
ऐ दोस्त,
दोस्ती का गुलशन
बचाने आ गए।

2-
रात ख्वाबों में
दिन खयालों में रहा,
वक्त है कि क़ाफ़िर
सवालों में रहा,
हर शय बिकी तो
बिका ज़मीर भी,
आदमी जंजीर ओ
तालों में रहा।

3-
वतन में लगी आग
तेरा बयां अपना,
बदलता है कफ़न क्यों
गुलिस्तां अपना,
बर्बादियोँ की हुकूमत
आबाद तेरा बिस्तर रहा
खाक में खाक हुआ फिर
शबिस्तां अपना।

4-
अपना सफर तय कर चली
रूह उसकी जान से,
अब बचा है खोखला
मैं क्या कहूँ भगवान से,
इंसान के यदि हाथ में
होता मौत का ये सफर,
क्यों बिछुड़ते हम भला
ना कहते अलिफ जुबान से?

5-
मुझे न मालूम मैं किस घड़ी
किस कदम चल पड़ा हूँ,
राजनीति की राह पर
बेदम,बेकदम चल पड़ा हूँ,
किसी लाचार बेसहारे का
सहारा बन सकूँ अगर,
मुकद्दर मुस्कुराएगा नेक
राह पर निकल पड़ा हूँ।

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