वक्त पर जो मिले

1-
फँस गया राहगीर
कत्ल के इल्जाम में,
खोज रहीं थी वर्दियां
घूम कर पंजाब में,
प्रशासन की जाँच पर
कुदरत भी खामोश थी,
भ्रष्ट रचने में लगे
शिकंजा शरीफ गांव में।

2-
वक्त पर जो मिले
ले चलो बेख़ौफ़ हो,
कौन पूछता है यहाँ
कातिल या निर्दोष हो,
जनता को भी चाहिए
मुज़रिम मिले अखबार में,
वर्दी को भी मिल रहा
मुनाफा इस रोजगार में।

3-
दुश्मनी हमसे करो
तो ये जान लो प्यारे,
वजह में शामिल तुम भी हो
वजह ये मान लो प्यारे,
हमारा क्या हमारी जान
भी है गैर के अंदर,
बाहर कपड़ा पुराना है कि
अन्दर झाँक लो प्यारे।

4-
अब हुस्न की साड़ियाँ
वो गाज बनकर टूटतीं,
तोड़ते गुलबदन अब
टूटे हुए बीमार हैं,
तुमने दवा की बात कर
कुछ रोग की पहचान की,
हम तो लुटाकर आबरु
समझे कि हम बीमार हैं।

5-
औरत को महकाने की
कोशिश न कर,
तेरे महकाने से
न महकेगी औरत,
जो खुशबू आ रही है
उसके बदन से
क्रीम-पाउडर की महक का
असर है प्यारे।

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