न पूछ मुफ़लिसी में

1-॰
न पूछ मुफ़लिसी में
क्या जुर्म ढ़ाती है दुनियां,
अपनी होकर भी बेगानी
नजर आती है दुनियां
हर दिल लगाता है तोहमत
गुमां की हम पर,
हमें सिक्कों पर उछलती
नजर आती है दुनियां।

2-
जिन्दगी के कांटोँ को न
स्वीकार कर सके,
न मिले शूल न दर्द का
अहसास कर सके,
चले थे मीलों मगर
न कोई मंजिल मिली,
मंजिल पर जाने से पहले
यहीं तो खड़े थे।

3-
चन्द्रमा पर दाग है पर
चाँदनी का राज भी,
खूबसूरत भी बहुत
पत्थरदिल धड़कन बिना,
शायर न बोला मगर
शायरी ने कह दिया,
तू चल पकड़ रास्ता
नाप अपनी और गली।

4-
हालात ही इंसान को
शैतान बना देते हैं,
गर्दिशों के दिन तो
हिमालय भी झुका देते हैं,
मैं भी दुःखी था इन
दिनों की मार से बहुत,
जो सह लेते हैं वार
मजा देते हैं।

5-
अहसास जिन्दगी का
कर सकता नहीं,
मायने जिन्दगी के
बदल सकता नहीं,
मर जाएगा अहसास में
श्रीराम के बिना,
यदि उसूल रावण के
बदल सकता नहीं।

[email protected]/9910198419

Leave a Reply