ताज

ऐ ताज
मेरे ताज,
चमचमाती संगेमरमर के मालिक,
यह क्या?
खफ़ा हैं शहंशाह
बनवाया गया था तुझे
मुमताज की याद में
एक अजूबा,
ताकि संरक्षित रह सके
बादशाह की निष्ठा
मुमताज की याद
पर आज—?
पति के प्रेम के परिचायक-
क्या बदल गया
तेरा वादा,
क्योंकि
प्रेम करने लगीं हैं तुझसे
लाखों-करोड़ों
रक्तिम-यौवनाएं,
और लुट रहीं हैं
उनकी देह
बेवफ़ा प्रेमियों की बाँह।
क्या उचित है
तेरा यह क्रत्य
न्यायार्थ मुमताज के लिए?
पर अफसोस
तेरा अडिग रहना
पाना ख्याति
कहलवाना ‘ताज’?

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