इससे ज्यादा क्या कहूँ

उठें हरदम सूरज से पहले
थोड़ी देर प्रणायाम करें
शुरू करें अपनी दिनचर्या
ईश्वर उर में ध्यान करें

ना खाएं दूध सुबह को
और रात में कभी दही
सात्विक रखें भावना
विचारें केवल सही सही

कम खाएं,औरों को खिलाएं
कभी कभी उपवास करें
ठूस ठूस कर मेरे भाई
ना देह का सत्यानाश करें

कुछ ना लगेगा आपका
जो मुश्कराकर बोलेंगे
नई दुनिया मिल जायेगी
जब भेद दिलों का खोलेंगे

बुद्धि मलीन कपडे नवीन
ये सयोग बड़ा घातक है
लो सुबह की प्राणवायु
ये जीवन उपाजक है

ये जरुरी बातें है
इनका ना उपहाश हो
आत्मा संतुस्ट रहेगी
जब कभी स्वर्गवाश हो

उठाकर चलो सीना ताने
मदद करने का भाव लिए
बोलिए इतना मधुर की
जन्म जन्म का घाव भरे

पत्नी को जी भर सहारें
बच्चों को प्यार दुलारें
समर्पित प्रेम हो तो
मुश्किल होती किनारे

पैर धोएं सोने से पहले
ना पियें पानी खाने के बाद
दुःस्वप्न से दूर रहेंगे
पेट का बना रहेगा साथ

पराई स्त्री पराया धन
से दूर रहें तो अच्छा है
इससे ज्यादा क्या कहूँ
कौन यहाँ पर बच्चा है

2 Comments

  1. [email protected] 22/06/2014
    • Santosh M Gulati 24/06/2014

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