गीत – अच्छे दिन आने वाले हैं

सपनों ने पाँखें खोली आशाएँ लरजी हैं
कहते हैं अच्छे दिन फिर से आने वाले हैं |

नई दिशा का एक सवेरा
आज उदय होगा,
नई चुनौती से जग सारा
पुन: विलय होगा,

खुशियों की सांकेतिक मंशा खुलकर गरजी है,
कहते हैं अच्छे दिन नभ पर छाने वाले हैं |

चली लहर केसरिया
देश हिलोरें मार रहा,
मँहगाई, घोटालों को
खुलकर ललकार रहा,

सोने की चिड़िया फिर चहके सबकी मरज़ी है,
कहते हैं अच्छे दिन खुलकर गाने वाले हैं |

झुकती पीठ देश की शायद
फिर से तन जाए,
टूटी अर्थव्यवस्था शायद
पटरी पर आए,

हो सबका कल्याण यही जनता की मरज़ी है,
कहते हैं अच्छे दिन फिर मुसकाने वाले हैं |
***
रजनी मोरवाल
अहमदाबाद
मो. ०८१४११७८८८०

3 Comments

  1. रजनी मोरवाल 23/06/2014
  2. Rajeev Gupta 24/11/2014

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