माँ की स्तुति !

हे अम्बा जगदंबिका, नाव पड़ी मझधार,
हाथ बढ़ाजे करनला, नाव लगाजे पार।।
तूँ ही तरणी तारणी, माँ करणी शरण तुम्हार,
पार उतारो अंबिका, माँ विनती बारम्बार।।
तेरे चरणा में पड़यो, तूँ मोटी दातार,
म्हैर हुवे जद आपकी, भरज्यावे भंडार।।
जीभ बिचारी पापणी कियाँ लगावे टेर,
किरपा करज्यो मावड़ी, लगा माती ना देर।।
साय हुवे तूँ सेंग री, म्हारी बेर ऊबेर,
कीनियाणी किरपा करो, मती लगाओ देर।।
कर जोड़यां गाडण कहे, अरज सुणों महमाय,
कुल री लाज बचावज्यो, डुबत बेलयां आय।।
शरण तिहारी अंबिका, म्हे तो पड़या हां आय,
महर करो माँ करनला, तूँ मोटी महमाय।।

मनोज चारण

मो. 9414582964

2 Comments

  1. Man Mohan Barakoti 05/06/2014
  2. lokeshwarsahu 06/06/2014

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