गो माता गीत

चरा कर गाय को कान्हा, यहाँ भगवान बन जाते |
ब्यथा गायों की सुनकरके, धरा पर राम जी आते ||

हमारे देश में तो गाय को माता कहा जाता |
करे जो गाय की सेवा, उसे दाता कहा जाता ||
सताते जो हैं’ गायों को, कहे जाते महापापी |
हुआ गो श्राप से था नष्ट रावण शास्त्र बतलाते ||

कभी गायों की महफ़िल में, बजाते श्याम थे वंशी |
बना इतिहास ग्वालों का, कहाये श्रेष्ठ यदुवंशी ||
हुए जो भूप रघुवंशी, उन्होंने की थी’ गोसेवा |
किया था प्राण न्योछावर, ये’ कालीदास लिख जाते ||

गऊ है मातृ शक्ती शुद्ध भक्ती युक्त गुणरूपा |
करें सब गाय की सेवा,  ये’है त्रिगुणात्मिका रूपा ||
जिन्होंने की है गोसेवा, मिले पुरुषार्थ चारों है |
धरा सुख भोगकर कर गोभक्त ही गोधाम को जाते ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी

9582510029

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