पति, पत्नी और कविता

पति, पत्नी और कविता
साथ रहे कैसे
बड़ी है दुविधा
पति बेचारा क्या करें भाई
हुक्म चलाती हरदम लुगाई
जलन के मारे आपा खोए
जब भी पति कविता संग होए

डर के मारे पति न बोले
कविता की बाते न खोले
सो जाती जब पत्नी रात
कर लेता कविता से बात
कविता ना देगी पानी दाना
कहती बीबी, मारती ताना

दोनो से ही प्रेम है गहरा
कविता मेरा प्रेम है पहला
बीबी से जनमो का नाता
क्या करु समझ न आता
ऐसा कुछ हो जाए उपाए
कविता ना रूठे, बीबी मान जाए

3 Comments

  1. सत्येन्द्र प्रताप सिह 18/02/2014
  2. Rinki Raut 19/02/2014
  3. सत्येन्द्र प्रताप सिह 20/02/2014

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