एहसास

ऐसा अक्सर हुआ है,
तेरे एहसास ने मुझे छुआ है.

ये तो नहीं कि जुस्तजू से है शिकायत,
मेरे इल्म ने मुझे तनहा किया है.

दरिया पे छपछपाती बरसात की तरह,
तेरे होने से मेरा होना हुआ है.

वो बहाने बहाने में तुझे छू जाना,
मुद्दतों बात भी पहली बार जिया है.

ये तो नहीं कि इक होने की है ख्वाहिश,
तेरी याद, तेरा साया मुझसे जुड़ा है.

2 Comments

  1. gopi 02/01/2014
  2. Rinki Raut 02/01/2014

Leave a Reply