मिलन

उठी झील से सर्द पवन,
औ’ प्रीतम प्रीत लगाई.

हाथ साथ, हृदयों का कम्पन,
मन की रास रचाई.

चुम्बन चुम्बित, चंचल चितवन,
निशा प्रखर मुसकाई.

मन वीणा झंकृत सी, सब स्वर,
सरस रागिनी गाई.

नित नवीन से, नयन प्रखर,
नव रचना सरजाई.

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  1. arpita joshi 25/12/2013

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