पुष्प

वृक्ष के   ह्रदय  का ,आनंद होता पुष्प

उल्लास अभिव्यक्ति का, आवाज होता पुष्प

पवित्र भावनाओं का, प्रतीक होता पुष्प

सुकोमल संवेदना का, चित्र होता पुष्प

कहता है सुमन,  हे श्रेष्ठ मानव जन

निराशा के कुहासे से, जरा बाहर निकल

हो जा समर्पित, लक्ष्य में फूलों समान

है धरोहर सीख मेरी, ये गहरी मुस्कान

कल्पना में रंग भरकर,उड़ चलो ऊँची  उड़ान

मस्त रहे उन्मुक्त हो कर,जब-तलक है ये जहान

4 Comments

  1. SUHANATA SHIKAN 19/11/2013
    • भारती दास 22/03/2014
  2. सुनील कुमार दास 11/03/2014
    • भारती दास 22/03/2014

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