नर और नारायण

नर और नारायण में अंतर क्या?
क्या नर नारायण की देन हैं
या नर की नारायण देन हैं?
प्रश्न संकुचित नहीं हुआ
जबसे हमने इसके विस्तारण
और समीचीन निस्तारण
का प्रारम्भ किया प्रयास!

अभी तक परमात्मा के
जितने भी रूप हुए
जग में उनके जितने भी
एक से बढ़कर एक दूत हुए
सब एक नर ही तो थे,
सबकी एक जैसी जिंदगी
एक सी ही भूख और
एक सी सी थी प्यास|

फिर कब हुए नारायण अलग नर से!

एक चिंगारी भी लगा सकती है आग
भरी पूरी बस्ती में,
हल्का सा अंधड़ उड़ा सकता है
बवंडर मचा सकता है
हरे-भरे बाग़ को बना सकता है
एक उजाड़, निर्जन बियाबान
या बदल सकता है तस्वीर
बनाकर श्मशान!

नर और नारायण में अंतर
क्या चमत्कार की देन है ?
शैतान भी तो करते हैं चमत्कार|
सिर्फ चमत्कार के भला और बुरा होने से
कैसे कोई बन जाएगा भगवान
और कोई शैतान!

फिर नर क्या भगवान
और शैतान के बीच का औसत है
या मिश्रण के आधार पर
आधारित औसत जीव है
जिसमें जितना भगवान हैं
उतने ही हैं शैतान!
अतः कभी तो होता है
वह इंसान और कभी
बन जाता है एक हैवान!

पहेली उलझ जाती है
पूरी तरह गले में फंस जाती है|
उत्तर मिलने के बजाय
प्रश्नों की बाढ़ सी आ जाती है|

गुफा में गया, जंगल में सोया
खाना छोड़ा, पीना छोड़ा
हवा पीकर जीना सीखा
तो एक और किस्म का प्राणी
बनकर रह गया
और लोगों ने मुझे
न नर रहने दिया, न नारायण
और बना दिया नर और नारायण को
जोड़ने वाली एक कड़ी |

भगवान ! फ़रिश्ता! इंसान! शैतान!
शैतान बन सकता है इंसान
जिस दिन निभाता है वह इंसानों का फर्ज!
इंसान ही तो हो जाता है फरिशता
जब वह बन जाता नेक!
फरिश्तों को लोग बना देते खुदा
जब वह इंसानियत की
कर लेता है हदें पार!
नर ही नारायण और
नारायण ही हैं नर|

2 Comments

  1. भारती दास 18/11/2013
  2. Rinki Raut 18/11/2013

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